Friday, September 1, 2017

ganesh puja (गणेश पूजा )



हिंदुत्व के नियमानुसार सभी देवी देवताओं की उपासना और पूजा आदि अनंत काल से होती आ रही है | ब्रह्माण्ड को सकारात्मक बनाये रखने हेतु यह अति आवश्यक है | सभी मानव सृष्टि को सही रूप से बनाये रखने हेतु ये पूजा विधान अति आवश्यक हैं | ज्यादातर मनुष्य यही समझते हैं कि हिंदुत्व एक धर्म है | जबकि हिंदुत्व एक ऐसा विधान है जिसको सही विधि विधान से करना अति आवश्यक है | 



समय के साथ-साथ पूजा पाठ के विधानों में भी परिवर्तन आते गए | आज के समय में पूजा विधान के स्थान पर मनोरंजक त्यौहार मनाते देखा जाता है | गणेशोत्सव भी ऐसा ही एक उत्सव है | पहले गणेश मूर्ति सिर्फ पंडालों में ही स्थापित की जाती थी | परन्तु अब हर घर में लोग मूर्तियां स्थापित कर पूजा करने लगे हैं |   एक क्षेत्र में एक ही पंडाल हुआ करता था | परन्तु अब हर घर में मूर्ति स्थापित की जाती है | 



मूर्ति विसर्जन के दौरान नदी और तालाबों का पानी जहरीला हो जाता है | क्यूंकि मूर्ति में कई प्रकार के रासायनिक (chemical) रंगों का प्रयोग किया जाता है | इस से प्रदुषण (pollution) फैलता है | शुद्धता के स्थान पर गन्दगी ही फैली दिखाई देती है | मूर्तियां मंदिरों और पंडालों में ही स्थापित होनी चाहिए और सभी लोगों को वहीँ जाकर पूजा करनी चाहिए |  घर में ध्यान कीर्तन इत्यादि किया जा सकता है | 



इस प्रकार हिंदुत्व (Hindutva) के कई विधानों को परिवर्तित किया गया है | तो किसी भी विधान को करने से पहले अच्छी तरह जाँच लेना चाहिए की कौन सा विधान सही है | 


मूर्तियां सिर्फ मंदिरों और पंडालों में ही स्थापित की जानी  चाहिए | विशेष रूप से मंदिरों और पंडालों में बनाये गए स्थान पर मूर्तियां स्थापित करने पर वहां बहुत ज्यादा ऊर्जा शक्ति मौजूद रहती है | और जब लोग वहां पूजा अर्चना करने जाते हैं तो उन्हें पूरा लाभ प्राप्त होता है | 

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