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Wednesday, July 6, 2016

old age and property (वृद्धावस्था और संपत्ति)




क्या हमारे संस्कारों के अनुरूप ही हमारा जीवन चल रहा है? क्या हम सभी अच्छा कर्म करते आ रहे हैं क्या किसी से कोई भूल होती ही नहीं ? अक्सर देखा यही जाता है कि हरेक व्यक्ति अपने को बहुत नेक दिल साबित करता हुआ दिखाई देता है | परंतु वास्तविक रूप से ऐसा होते हुए नहीं दिखता | 




प्राचीन काल से ही एक बुरी आदत लोगों में खास तौर पर देखी जाती है | वो है संतान की अपने पिता की संपत्ति पर नज़र | देखने में यही आता है कि माता पिता के जीते जी ही संतान उनकी कमाई हुई संपत्ति प्रयोग करने लगता है | 

 



माता पिता निःस्वार्थ भावना से अपने बच्चों की परवरिश करते हैं | परंतु बड़े होने पर आत्म निर्भर बनने की वजाय संतान यह देखती है कि मेरे माता पिता के पास कितनी संपत्ति है | और माता पिता की संपत्ति को अपने सुख के लिए खर्च करने में ज़रा भी वक्त नहीं लगाते | और फिर ऐसा भी कहते हुए देखे जाते हैं कि हमारे माता पिता ने हमारे लिए कुछ नहीं छोड़ा |




 तो समझने वाली बात यह है कि इंसान आख़िर जन्म क्यूँ लेता है | सिर्फ़ सुख प्राप्ति के लिए ? ज्ञान के अभाव में इंसान यही सोचता है कि जन्म सुख भोगने के लिए ही होता है | माता पिता अपनी सारी जीवन की एक- एक पाई जोड़कर पूंजी इकट्ठी करते हैं कि वृद्धा वस्था में जब शरीर कमजोर हो जाएगा तब ये धन उनके काम आएगा | 

 

परंतु अजीब संस्कार देखने को मिलता है जब बेटे बहू यह कहते हुए देखे जाते हैं क़ि बुजुर्गवस्था में इनको इस धन की क्या आवश्यकता है | और बड़ी दुखद स्थिति दिखाई देती है कि जो माता पिता जवानी में अपने बच्चों के भविष्य के लिए अपनी सारी खुशियाँ भूल कर बच्चों की परवरिश में लगे रहे | उन्हें वृद्धावस्था में भी कोई सुख चैन प्राप्त नहीं होता |  बच्चों के  बँटवारे को लेकर आपसी झगड़े को देखते हुए  माता पिता को बेमौत मरते देखा है | कितना भी शिक्षित परिवार क्यूँ ना हो ऐसी घटनाएँ आम हो गयी हैं |



अक्सर बहुएँ सास के जेवर मिलने का इंतजार करते हुए देखी जाती हैं | ज़्यादातर लोग ज्ञानी बन कर उपदेश देते हुए देखे जाते हैं | कि मरने के बाद सब यहीं रह जाता है | साथ कुछ नहीं जाता | फिर भी इंसान उस धन को पाने की लालसा में अपनों को खोने को तत्पर रहता है | यदि किसी परिवार में चार बेटे हैं तो एक लालच वश पिता का धन छीनता है तो सभी बेटे यही ग़लती करते हुए देखे जाते हैं | और जीते जी माता पिता बँटवारा करके एक दुख भरा जीवन जीने पर विवश हो जाते हैं | क्योंकि बच्चों के आगे हर माता पिता हार जाते हैं |